नमन एवं श्रद्धांजलि जिन्होंने दिया भारतीय उद्यमिता  को नए आयाम

भारतीय उद्यमिता 

जिन्होंने दिया भारतीय उद्यमिता को नए आयाम इन उद्यमियों ने अभूतपूर्व व अनोखे तरीके से भारतीय कारोबार को एक नई दिशा दी। नमन एवं श्रद्धांजलि!!

मोहन सिंह ओबराय

शिमला स्थित होटल सेसिल के प्रबंधक अर्नेस्ट क्लार्क ने होटल के क्लर्क मोहन सिंह ओबेराय को लगाववश प्रबंधन का काम इसी युवा क्लर्क को सौंप दिया। बाद में वे मालिक बन गए।

चेन

ऐसी बेहतरीन लग्जरी सुविधाएं व सेवाएं दी जिसने दुनिया के अमीरों को मोह लिया। आज इनके ओबेराय ट्राइडेंट नाम से 7 देशों में 5 स्टार 32 होटल व 2 रिवर क्रूज हैं।

केदारनाथ अग्रवाल 1

1905 में बीकानेर में बीकानेर नमकीन भंडार की शुरुआत की। 1950 के दशक में दिल्ली की तंग गलियों में घूम घूम कर कर बाल्टियों में भरकर भुजिया व रसगुल्ला बेचा।

केदारनाथ अग्रवाल 2

स्ट्रीट वेंडर से संघर्ष कर चांदनी चौक में दुकान खोल ली। आज आलम यह है कि बीकनेरवाला समूह का कारोबार 1300 करोड़ से अधिक व देश विदेश में 150 आउटलेट से अधिक है।

केशव महिंद्रा १

इनके पिता कैलाश महिंद्रा व दोस्त मोहम्मद ने महिंद्रा व मोहम्मद कंपनी शुरू की। 1947 में मोहम्मद के पाकिस्तान चले जाने पर कंपनी का नाम महिंद्रा & महिंद्रा हो गया।

केशव महिंद्रा 2

विली जीप और ट्रैक्टर से जुड़े। 1963 में अध्यक्ष बनने के बाद आई टी, होटल, लॉजिस्टिक्स, वित्त, रियल एस्टेट, ऊर्जा सहित 20 से अधिक क्षेत्रों में कंपनी का विस्तार कर दिया।

सुब्रत राय सहारा 1

1978 में गोरखपुर से 2000 रुपए और लैंब्रेटा स्कूटर से कहानी शुरू होकर तमाम संपतियों का निर्माण किया। विवादित रहे हैं पर उद्यमशीलता अनूठी थी।

सुब्रत राय सहारा 2

लखनऊ में 300 एकड़ में फैले सहारा शहर पुणे में अम्बे वैली और विदेश में अनेक 5 स्टार होटल तक। फिल्म, खेल, सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़ कर भाग लिया।

विरासत

इन चारों ने 2023 में जाने से पहले अपनी अनूठी उद्यमशीलता व अनथक श्रम से अपने समूह को बुलंदियों पर पहुंचा दिया। विश्वास है कि इनकी विरासत अपने समूह को और विस्तार देगी।

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