हमें टैक्स देने में क्यों होती है तकलीफ ?

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हमें टैक्स देने में क्यों होती है तकलीफ ?

अब जानिए कि भारी टैक्स देने के बाद टैक्स पेयर को क्रोध क्यों आता है? कुढ़न क्यों होती है ? लुटा ठगा सा क्यों अनुभव करता है ?

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टैक्स से देश सशक्त होगा ?

कड़ी मेहनत, काबिलियत और रिस्क लेकर त्याग करके कमाए गए धन को जब सरकार अमीर आदमी से यह कह कर ले लेती है कि हम संविधान के अनुसार चलकर गरीबों और दबे कुचलों का भला करेंगे और देश का विकास करेंगे, स्कूल खोलेंगे अस्पताल बनवाएंगे आदि । तब टैक्स पेयर खुश होता है कि चलो हमारे पैसे से समाज का फायदा होगा, गरीबों का भला होगा, उनका जीवन स्तर सुधरेगा, उन्हें मुख्य धारा में आने का मौका मिलेगा, समाज बेहतर बनेगा, देश सशक्त बनेगा, इसीलिए अनेक लोग टैक्स खुशी-खुशी टैक्स देते रहे हैं।

सरकारें 70- 80 परसेंट तक कर रही बर्बाद 

अमीरों के गाढ़ी कमाई से छीने गए इन रुपयों का थोड़ा बहुत वेस्ट हो जाए तो समझ में आता है । कई सरकारें तो 70- 80 परसेंट तक बर्बाद कर रही हैं।

टैक्स पेयर की कमाई का करते क्या है ?

ये लोग टैक्स पेयर के मेहनत की कमाई का करते क्या है ? भ्रष्टाचार में उड़ा देते हैं, गाड़ियों का काफिला लेकर चलते हैं,डेलिगेशन लेकर विदेश घूमते हैं, लग्जरी आइटम्स की खरीद करते हैं, चाय नाश्ते में उड़ा देते हैं अपनी स्वयं की पब्लिसिटी में राज्य के संसाधन झोंक देते हैं।मास मीडिया और सोशल मीडिया पर सैकड़ो करोड़ खर्च करते हैं ।

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संविधान गरीबों के लिए प्रतिबद्ध 

संविधान में गरीबों की मदद के लिए कहा गया है । यह सभी को यानी मध्य वर्ग और अमीरों को भी सुविधा दे देते हैं, मुफ्त बिजली और पानी देते हैं, हज और तीर्थ यात्रा की व्यवस्था करते हैं, शादियां तक करवाते हैं स्कूटी तक बांट रहे हैं।

अब जरा देख लें,  कैसे शुरू हुई, किस नेता ने इसे सबसे ज्यादा बढ़ावा दिया ।

किस नेता ने शुरू किया ?

बहुगुणा ने सरकारी संसाधनों से रोज़ा इफ्तार शुरू किया,शीघ्र ही अनेक सरकारों ने इसे अपना लिया था ।

शिवराज सरकार

हज सब्सिडी की प्रतिक्रियास्वरूप मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार ने पहली बार कन्यादान और तीर्थ दर्शन योजना शुरू की, जिसे शीघ्र ही तमाम सरकारों ने अपना लिया। ये कुछ उदाहरण हैं पर इस पर सबसे ज्यादा जोर दिया केजरीवाल ने।

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फ्रीबीज को सर्वप्रमुख नीति बनाने वाले पहले नेता केजरीवाल 

पहले फ्री बीज और सब्सिडी केवल किसानों और गरीबों को दी जाती थी। चुनावी मेनिफेस्टो में कोई भी दल इस पर बहुत जोर नहीं देता था। केजरीवाल ने मजबूत कांग्रेसी नेता शीला दीक्षित को हराने के लिए बिजली सत्याग्रह किया था और फिर सरकार आने पर उन्होंने 200 यूनिट बिजली को फ्री और 201 से 400 आधा बिल कर दिया।

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केजरीवाल ने फ्रीबीज़ का दायरा बढ़ाया

इससे बड़ी सफलता मिलने के बाद उन्होंने इसका दायरा बढ़ाकर इसे अधिक क्षेत्रों में लागू कर दिया जैसे 20000 लीटर तक फ्री पानी, फ्री मेडिकल, दवा, टेस्ट महिलाओं को फ्री बस यात्रा और मेट्रो राइड, तीर्थ यात्रा ए सी में आदि। ये अन्य वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाकर फ्री दे रहे हैं ।यह सब अपनी राजनीति चमकाने के लिए किया जा रहा है। आश्चर्य है कि इतना पढ़ा लिखा नेता और अन्ना  हजारे का यह चेला जनता को मूर्ख बना रहा है।

सब्सिडी का सारे वोटरों तक विस्तार 

पहले केवल गरीबों व किसानों को सरकारी फ्रीबीज व सब्सिडी देती थी। केजरीवाल इसे  सारे वोटरों तक ले गए और सारे राजनीतिक दलों ने उनके कुकृत्य का अनुसरण करना शुरू कर दिया ।लगता नहीं  है यह जल्दी रुकेगा।

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फ्रीबीज का इस्तेमाल कर वोट बैंक खड़ा

फ्रीबीज और सब्सिडी पर फुल फोकस पूरी चालाकी से अपना वोट बैंक खड़ा करने के लिए किया गया। केजरीवाल जानते थे कि कांग्रेस से न अल्पसंख्यक वोट तोड़ पाएंगे और न बीजेपी से बहुसंख्यक वोट बैंक छटका पाएंगे । उनका कोई बड़ा जातीय आधार भी नहीं बन सकता था ।इसीलिए उन्हें क्लास या गरीब पर फोकस किया ।

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देश व जनता के दीर्घकालीन हित में कतई नहीं

प्राइमरी स्कूल और मोहल्ला क्लीनिक तो ठीक है पर बिजली, पानी स्केयर रिसोर्स है और उनका मुफ्त में देना बर्बादी है। सभी महिलाओं को फ्री बस और मेट्रो राइड भी उचित नहीं है। वोट की फसल काटने में केजरीवाल भले सफल हो गए हों किंतु यह देश व जनता के दीर्घकालीन हित में कतई नहीं है।

कर्नाटक चुनाव में फ्रीबीज का वायदा

केजरीवाल ने शुरू किया था पर कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस ने फ्रीबीज का वायदा कर चुनाव जीत लिया। कर्नाटक सरकार ने अपने वादे के अनुसार इन्हें लागू भी कर दिया । सभी प्रदेशवासियों को 200 यूनिट फ्री बिजली दी जा रही है । सभी परिवारों की महिला हेड को ₹2000 प्रति माह दिया जा रहा है । सभी बेरोजगारों ग्रेजुएट को ₹3000 प्रति माह बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है। सभी बेरोजगार डिप्लोमा होल्डर्स को ₹1500 प्रति माह बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है । सभी महिलाओं को राज्य भर में फ्री ट्रैवल सुविधा दी जा रही हैं । कर्नाटक में फ्रीबीज और सब्सिडी की सफलता के बाद लगता है कि अब आगामी सभी चुनावों में कांग्रेस इन पर फोकस करके ही लड़ेगी।

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 भाजपा : फ्रीबीज और सब्सिडी

80 करोड लोगों को मुफ्त खाद्यान्न

जहां तक भाजपा की बात है उसने विश्व की सबसे बड़ी मुफ्त खाद्यान्न योजना शुरू की है। इसमें सारे देश के 80 करोड लोगों को मुफ्त खाद्यान्न बांटा जा रहा है। कोरोना संकट समाप्त हो गया है । जहां अन्न संकट हो,वहां जरूर बांटे।बगैर आवश्यकता इस तरह बांटने से अकर्मण्यता को बढ़ावा मिल रहा है। श्रमिकों के अंदर काम करने की प्रेरणा कम हो रही है।

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बुलेट ट्रेन

बुलेट ट्रेन चलाने से किस गरीब को फायदा मिलने वाला है ?

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एम पी की लाड़ली बहना योजना

मध्य प्रदेश के विधान सभा चुनाव के पहले जून 2023 में शिवराज सरकार ने प्रदेश के करोड़ों महिलाओं को 1000 रुपया देना शुरू किया। जिसे बढ़ाकर 1250 रुपया कर दिया गया और इसे बढ़ाकर 3000 रुपया करने का प्रलोभन दिया गया।ये एक तरीके से उनका वोट खरीदने की कोशिश है।यह प्रदेश के दीर्घकालीन हित में कतई नहीं है क्योंकि यह धन उत्पादक कार्यों में नहीं लग रहा है। यह धन मध्य प्रदेश की महिलाओं को आत्म निर्भर न बनाकर निर्भर बनायेगा। श्रम वाले कार्यों को करने से विमुख करेगा।

रेवड़ी कल्चर

खाली दूसरे नेताओं द्वारा दी जा रही फ्रीबीज और सब्सिडी को रेवड़ी कल्चर कह कर आलोचना करने से काम नहीं चलने वाला।देश के दीर्घकालीन हितों के लिए सख्त कदम उठाने ही होंगे। ऐसी व्यवस्था करनी पड़ेगी ताकि आगे आने वाले क्षुद्र नेताओं की कुत्सित सोच से देश के दीर्घकालीन हितों पर आघात न लग सके।

इन सभी को कुकृत्यों व  कुकर्मों को देखकर अब स्वयं निर्णय लीजिए कि हम सब टैक्स पेयर का कितना पैसा वाकई देश हित में व्यय हो रहा है!

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