धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला

Date:

धन कमाना एक कला है

और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (1))img

धन के बिना जीवन संभव नहीं ?

*             धन हमें अनेक कार्यों को करने की शक्ति देता है। चयन की ताकत देता है। अधिकांश लोग पैसे की कमी से अपनी आवश्यकताएं पूरी नहीं कर पाते। हर कार्य के लिए पैसा चाहिए। धन हमारे जीवन की आधारभूत आवश्यकता है,  इसके बिना जीवन संभव नहीं है।

परखें धन की महत्ता को

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (2))img

*             आज धन सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुका है। अधिकांश लोगों के लिए जीवन के लिए धन नहीं, धन के लिए जीवन हो गया है। आइए परखें कि जीवन में धन की महत्ता कितनी है? हमारे जीवन में धन की कीमत उतनी ही है, जितनी गाड़ी में पेट्रोल की, न उससे ज्यादा, न उससे कम। बगैर ईंधन के गाड़ी चल नहीं सकती, लेकिन हम केवल पेट्रोल भरने के लिए गाड़ी नहीं खरीदते।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (3))img

धन कितना जरूरी?

*             पैसे का महत्व जीवन में कितना है, इसे समझना बहुत जरूरी है । जीवन में खुशियां, स्वास्थ्य, शान्ति, संबंध आदि भी जरूरी है। जीवन का मुख्य मकसद है खुश रहना और इसके लिए थोड़े से धन की ही आवश्यकता पड़ती है।

बेतहाशा अंतहीन दौड़

अधिकांश मुख्य मकसद को छोड़कर मूर्खों की तरह धन के पीछे बेतहाशा, अंतहीन भागते रहते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि समाज में ज्यादातर लोग किसी को जज करते हैं, उसके धन या पद को देखकर, यानी चाय न देखकर महंगा कप  देखा जाता है ।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (4))img

धन का वास्तविक मूल्य

चाय बढ़िया हो तो उसे सस्ते कप में भी इंजॉय किया जा सकता है। अगर घटिया है तो लाख रुपए के कप में भी अच्छी नहीं लगेगी। बाहर वाले इंप्रेस होंगे, अरे वाह, देखो, लाखों रुपए के कप में चाय पी रहा है, कितना रईस है, पर चाय पीने वाला व्यक्ति अंदर से अच्छा अनुभव नहीं करेगा ।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (5))img

99 के चक्कर में हम सब

*             पैसे का मूल्य जीवन में कितना है, यह समझने में हम अक्‍सर गलती करते कर देते हैं। हमें पैसे की सही कीमत पहचानना चाहिए । हमने हजार या लाख या करोड़ कमाया, मरने के बाद तो सब मिट्टी हो ही जाना है । फिर भी हम 99 के चक्कर में जीवन भर पड़े रहते हैं ।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (6))img

धन के मोह बढ़ता ही जाता है।

ज्यों ज्यों धन बढ़ता जाता है, हमारा धन के प्रति मोह भी बढ़ता जाता है। कितना आश्चर्य है कि मरते दम तक धन का आकर्षण बना रहता है ?

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (7))img

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (8))img

लाइफ स्टाइल में परिवर्तन नहीं

*             प्रश्न उठता है कि हमारे जीवन में धन की महत्ता कितनी होनी चाहिए? अधिकांश लोग धन की सीमा तय नहीं कर पाते। जैसे-जैसे धन आता है, उनकी भूख बढ़ती जाती है हालांकि और अधिक धन उनकी लाइफस्टाइल में कोई परिवर्तन नहीं ला रहा होता है । जिनके पास धन बहुत अधिक है, वे भी उसके पीछे पागल हो कर भाग रहे हैं।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (9))img

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (10))img

अमीरी केवल धन होने से नहीं आ सकती

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (11))img

*             हमें दिन में कम से कम एक बार उन चीजों पर अवश्य विचार करना चाहिए, जिन्हें धन से नहीं खरीदा जा सकता। ये आपको दिखलाएगा कि वास्तव में आप कितने अमीर है। अमीरी केवल धन होने से नहीं आ सकती।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (12))img

अधिक धन अच्छी नींद, सुख, शांति, रिश्ते, स्वास्थ्य नहीं दे सकता। उन्‍हें जिनके पास सिर्फ धन है, उनसे गरीब कोई भी नहीं है।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (13))img

बढ़ता जा रहा उपभोक्तावाद 

*             धन की महत्ता दिनों दिन बढ़ती जा रही है क्योंकि हमारा रहन-सहन महंगा होता जा रहा है। इसका एक कारण उपभोक्तावाद भी है। अब बाजार में मीडिया के माध्यम से कृत्रिम मांग पैदा कर दी जाती है, जिससे व्यक्ति को लगता है कि अमुक वस्तु का क्रय हर हालत में करना अत्यावश्यक है, जबकि ऐसा होता नहीं है। समाज में एक दूसरे की नकल करने की प्रवृत्ति और प्रदर्शन करने की प्रवृत्ति भी बहुत अधिक बढ़ गई है। सोशल मीडिया भी इन्‍हें बहुत बढ़ा रहा है।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (15))img

मेहनत से कमाए धन में बरकत

*             गलत रास्ते से कमाए गए धन की कीमत अवश्य चुकानी पड़ती है। अतः हुनर व काबिलियत का इस्तेमाल कर अपनी मेहनत से धन कमाना चाहिए। कड़ी मेहनत से कमाए धन में बरकत होती है और हम उसे सोच समझकर खर्च करते हैं। बर्बाद नहीं करते ।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (16))img

मुफ्त व इफरात में मिली वस्तु की कीमत नहीं 

*             जो चीज हमें मुफ्त में और इफरात में मिलती है, उसका महत्व नहीं समझते हैं। कोई अगर नाक दबाकर हमसे पूछे कि क्या चाहिए हमें, ऑक्सीजन या धन। तो हम सांसे ही मांगेगे। जो वस्तु हमारे पास नहीं होती, उसकी कीमत बहुत बढ़ जाती है।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (17))img

धन के इंतजार में

*             अधिकांश लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं कि धन आए तो मैं कुछ करके दिखाऊं और धन कहता है कि तू कुछ कर तो मैं आऊं।

बचत की महत्ता

*             अधिकांश यह सोचते हैं कि धन की आमद ही आपको अमीर बनाती है। केवल आपका धन आपको अमीर नहीं बनाता, बल्कि सोच समझ कर खर्च करने व बचत करने की आदत भी अमीर बनाती है ।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (18))img

केवल पैसे के लिए व्यापार

*             व्यापार जो सिर्फ पैसे बनाता है और कुछ नहीं, वह घटिया व्यापार है। ऐसा कार्य करें जो हमें पूर्णता दे, शांति दे और उसका सामाजिक सरोकार भी हो ।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (19))img

धन के गुलाम न बनें

*             हमें पैसे के गुलाम बनने से बचना चाहिए । अगर सोच पैसे शुरू हो और पैसे से ही समाप्त हो, तब जीवन का आनंद नहीं उठा पाएंगे।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (21))img

धन की प्रासंगिकता  

आवश्‍यकता व शौक पूरे किये जाएं और कुछ सामाजिक कार्यों में भी व्यय हो, तब धन की प्रासंगिकता सही मायनों में होगी।

धन कमाना एक कला है और उसे भोगना उससे भी बड़ी कला Sanjay Blogger (22))img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related articles

भारतीय समाज में उपहार देने की परंपरा

भारतीय समाज में उपहार देने की परंपराउपहार देने की परंपरा सदियों से भारतीय समाज में उपहार देने की परंपरा...

परंपराओं और आस्थाओं का त्यौहार छठ महापर्व

परंपराओं और आस्थाओं का त्यौहार छठ महापर्वचार दिनों तक चलने वाला त्योहार छठ पूजा पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और...

क्यों अनूठा है छठ महापर्व

क्यों अनूठा है छठ महापर्व ?वैदिक काल से लोकप्रिय *             छठ महापर्व वैदिक काल से ही चला रहा है।...

धन के पीछे अंतहीन बेतहाशा दौड़ से कैसे बचें ?

धन के पीछे अंतहीन बेतहाशा दौड़ से कैसे बचें ?नीड व डिजायर में अंतर हमें नीड और डिजायर में...